नन्द के घर आनंद भयो , हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की! शुभ जन्मआष्ट्मी!

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“मुरली मनोहर कृष्ण कन्हैया जमुना के तट पे विराजे हैं मोर मुकुट पर कानों में कुण्डल कर में मुरलिया  साजे है “

हमारी प्राचीन कहानियों का सौंदर्य यह है कि वे कभी भी विशेष स्थान या विशेष समय पर नहीं बनाई गई हैं। रामायण या महाभारत प्राचीन काल में घटी घटनाएं मात्र नहीं हैं। ये हमारे जीवन में रोज घटती हैं। इन कहानियों का सार शाश्वत है।

श्री कृष्ण जन्म की कहानी का भी गूढ़ अर्थ है। इस कहानी में देवकी शरीर की प्रतीक हैं और वासुदेव जीवन शक्ति अर्थात प्राण के। जब शरीर प्राण धारण करता है, तो आनंद अर्थात श्री कृष्ण का जन्म होता है। लेकिन अहंकार (कंस) आनंद को खत्म करने का प्रयास करता है। यहाँ देवकी का भाई कंस यह दर्शाता है कि शरीर के साथ-साथ अहंकार का भी अस्तित्व होता है। एक प्रसन्न एवं आनंदचित्त व्यक्ति कभी किसी के लिए समस्याएं नहीं खड़ी करता है, परन्तु दुखी और भावनात्मक रूप से घायल व्यक्ति अक्सर दूसरों को घायल करते हैं, या उनकी राह में अवरोध पैदा करते हैं। जिस व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, वह अपने अहंकार के कारण दूसरों के साथ भी अन्यायपूर्ण व्यवहार करता है।

अहंकार का सबसे बड़ा शत्रु आनंद है। जहाँ आनंद और प्रेम है वहां अहंकार टिक नहीं सकता, उसे झुकना ही पड़ता है। समाज में एक बहुत ही उच्च स्थान पर विराजमान व्यक्ति को भी अपने छोटे बच्चे के सामने झुकना पड़ जाता है। जब बच्चा बीमार हो, तो कितना भी मजबूत व्यक्ति हो, वह थोडा असहाय महसूस करने ही लगता है। प्रेम, सादगी और आनंद के साथ सामना होने पर अहंकार स्वतः ही आसानी से ओझल होने लगता है । श्री कृष्ण आनंद के प्रतीक हैं, सादगी के सार हैं और प्रेम के स्रोत हैं।

कंस के द्वारा देवकी और वासुदेव को कारावास में डालना इस बात का सूचक है कि जब अहंकार बढ जाता है तब शरीर एक जेल की तरह हो जाता है। जब श्री कृष्ण का जन्म हुआ था, जेल के पहरेदार सो गये थे। यहां पहरेदार वह इन्द्रियां है जो अहंकार की रक्षा कर रही हैं क्योंकि जब वह जागता है तो बहिर्मुखी हो जाता है। जब यह इन्द्रियां अंतर्मुखी होती हैं तब हमारे भीतर आंतरिक आनंद का उदय होता है।

“अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम। कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं।”

“नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। आनंद उमंग भयो, जय हो नन्द लाल की।”

“श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम। लोग करें मीरा को यूं ही बदनाम। सांवरे की बंसी को बजने से काम। राधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम। “

“पलकें झुकें और नमन हो जाए, मस्तक झुके और वंदन हो जाए, ऐसी नजर कहां से लाऊ, मेरे कन्हैया कि आपको याद करूं और दर्शन हो जाएं।।”

” प्रेम से श्री कृष्ण का नाम जपो दिल की हर इच्छा पूरी होगी कृष्ण आराधना में लीन हो जाओ उनकी महिमा जीवन खुशहाल कर देगी “

” कृष्ण जिनका नाम, गोकुल जिनका धाम, ऐसे श्री कृष्ण भगवान को हम सब का प्रणाम, कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई

” श्री कृष्ण के कदम आपके घर आए आप खुशियों के दीप जलाएं परेशानी आपसे आंखे चुराए कृष्ण जन्मोत्सव की आपको शुभकामनाएं”

” छीन लूं तुझे दुनिया से मेरे बस में नहीं, मगर मेरे दिल से तुझे कोई निकाल दे, ये भी किसी के बस में नहीं जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं 

” माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने नचाया, खुशी मनाओ उसके जन्म दिन की, जिसने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया”

“श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी , हे नाथ नारायण वासुदेवा , एक मात स्वामी सखा हमारे , हे नाथ नारायण वासुदेवा.. जय श्री कृष्ण”

“पलकें झुकें , और नमन हो जाए… मस्तक झुके, और वंदन हो जाए… ऐसी नज़र, कंहाँ से लाऊँ, मेरे कन्हैया … कि ……आप को याद करूँ ,और आपके, दर्शन हो जाए…जय श्री कृष्णा”

“जन्माष्टमी के इस अवसर पर , हम ये कामना करते हैं कि श्री कृष्ण की कृपा आप पर, और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहे।”

“राधा की भक्ति , मुरली की मिठास , माखन का स्वाद और गोपियों का रास , सब मिलके बनाते हैं जन्माष्टमी का दिन ख़ास। …”

“आओ मिलकर सजाये नन्दलाल को, आओ मिलकर करें उनका गुणगान! जो सबको राह दिखाते हैं, और सबकी बिगड़ी बनाते हैं!
शुभ जन्मआष्ट्मी! “

“माखन चोर नन्द किशोर, बांधी जिसने प्रीत की डोर,हरे कृष्ण हरे मुरारी,पुजती जिन्हें दुनिया सारी, आओ उनके गुण गाएं सब मिल के जन्माष्टमी मनाये!”

“कान्हा!! ओ ! कान्हा आन पड़ी मैं तेरे द्वार… ओ !! कान्हा। … मोहे चाकर समझ निहार.. कान्हा आन पड़ी मैं तेरे द्वार ….”

“बाल रूप है सब को भाता माखन चोर वो कहलाया है, आला आला गोविंदा आला बाल ग्वालों ने शोर मचाया है, झूम उठे हैं सब ख़ुशी में, देखो मुरली वाला आया है, कृष्णा जन्माष्टमी की बधाई!”

“कन्हिया की महिमा , कन्हिया का प्यार ,’कन्हिया में श्रद्धा , कन्हिया से संसार , मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का त्यौहार। बोलो राधे राधे। ….”

“माखन का कटोरा , मिश्री का थाल , मिट्टी की खुशबू , बारिश की फुहार , राधा की उम्मीद कन्हिया का प्यार , मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का त्यौहार।”

“प्रेम से श्री कृष्ण का नाम जपो , दिल की हर इच्छा पूरी होगी , कृष्ण आराधना में तल्लीन हो जाओ , उनकी महिमा जीवन खुशहाल कर देगी।”

“माखन -चोर नन्द -किशोर , बाँधी जिसने प्रीत की डोर , हरे कृष्णा हरे मुरारी , पूजती जिन्हें दुनिया सारी , आओ उनके गुण गायें , सब मिलके जन्माष्टमी मनाएँ।”

“श्री कृष्ण के कदम आपके घर आये , आप खुशियों के डीप जलाएँ , परेशानी आपसे आँखे चुराएँ , कृष्णा जन्मोस्तव की आप सबको शुभकामनायें।”

“पलके झुका के नमन करे, मस्तक झुका के वंदना करे ! ऐसी नज़र दे मेरे कान्हा, जो बंद होते ही आपके दीदार करे !! कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये”

“कृष्णा जिनका नाम गोकुल जिनका धाम ! श्री कृष्णा भगवान् को हम सब का प्रणाम !! जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ।”

“राधा की भक्ति मुरली की मिठास, माखन का स्वाद और गोपियों का रास, सब मिलके बनाते हैं जन्माष्टमी का दिन ख़ास !!”

“पलकें झुकें, और नमन हो जाए मस्तक झुके, और वंदन हो जाए ऐसी नज़र, कंहाँ से लाऊँ, मेरे कन्हैया कि आपको याद करूँ और आपके दर्शन हो जाए”

“नन्द का दुलारा, देवकी का प्यारा, यशोदा की आँख का तारा जय हो तेरी गोकुल के ग्वाला, पीड़ा हरो हम सबकी अब तो दर्श दिखाओ भगवन, जय हो जय नटखट नन्द लाला वृन्दावन का यारा, तेरी सदा ही जय जय कारा कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामना”

“प्रेम से कृष्णा का नाम जपो दिल की हर इच्छा पूरी होगी कृष्णा आराधना में इतना लीन हो जाओ उनकी महिमा, जीवन खुशहाल कर देगी”

“हर शाम हर किसी के लिए सुहानी नहीं होती हर प्यार के पीछे कोई कहानी नहीं होती कुछ तो असर होता हैं दो आत्मा के मेल का वरना गोरी राधा, सांवले कृष्णा की दीवानी ना होती”

“गाय का माखन, यशोधा का दुलार ब्रह्माण्ड के सितारे कन्हैया का श्रृंगार सावन की बारिश और भादों की बहार नन्द के लाला को हमारा बार-बार नमस्कार”

“जन्माष्टमी के इस अवसर पर, हम ये कामना करते हैं कि श्री कृष्ण की कृपा आप पर, और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहे। शुभ जन्मआष्टमी |”